ब्रम्हा विष्णु शिव जी का जीवन परिचय
हिन्दू धर्म में ब्रम्हा विष्णु शिव जी का सबसे ऊचा स्थान है लेकिन क्या हम जानते है इनकी उत्पति कैसे हुई?
कोई कहता है की शिव जी ने इनकी उत्पत्ति की, कोई कहता है आदि शक्ति ने इनकी उत्त्पति की। यह सब आधार हीन बाते है। हम आपको आज बताते है इनका जन्म कैसे हुआ, कौन है इनके माता पिता और क्या इनकी मृत्यु होती है वह भी प्रमाणों क साथ।
हे मात! आप शुद्ध स्वरूपा हो, सारा संसार आप से ही उद्भाषित हो रहा है, हम
आपकी कृपा से विद्यमान हंै, मैं, ब्रह्मा और शंकर तो जन्मते-मरते हैं, हमारा तो
अविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) हुआ करता है, हम अविनाशी नहीं हैं। तुम
ही जगत जननी और सनातनी देवी हो और प्रकृति देवी हो। शंकर भगवान बोले,
हे माता! विष्णु के बाद उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा जब आप का पुत्रा है तो क्या मैं
तमोगुणी लीला करने वाला शंकर तुम्हारी सन्तान नहीं हुआ अर्थात् मुझे भी
उत्पन्न करने वाली तुम ही हो।
इस देवी महापुराण के उल्लेख से सिद्ध हुआ कि
श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शंकर जी को जन्म देने वाली माता श्री दुर्गा
देवी (अष्टंगी देवी) है और तीनों देव नाशवान है।
तक निम्न प्रकरण है:-
अपने पुत्रा नारद जी के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री ब्रह्मा जी ने कहा कि
हे पुत्रा! आपने सृष्टि के उत्पत्तिकर्ता के विषय में जो प्रश्न किया है, उसका उत्तर सुन!
प्रारम्भ में केवल एक “सद्ब्रह्म” ही शेष था। सब स्थानों पर प्रलय था। उस
निराकार परमात्मा ने अपना स्वरूप शिव जैसा बनाया। उसको “सदाशिव” कहा
जाता है, उसने अपने शरीर से एक स्त्राी निकाली, वह स्त्राी दुर्गा, जगदम्बिका,
प्रकृति देवी तथा त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव) की जननी कहलाई जिसकआठ भुजाएं हैं, इसी को शिवा भी कहा है।
हिन्दू धर्म में ब्रम्हा विष्णु शिव जी का सबसे ऊचा स्थान है लेकिन क्या हम जानते है इनकी उत्पति कैसे हुई?
कोई कहता है की शिव जी ने इनकी उत्पत्ति की, कोई कहता है आदि शक्ति ने इनकी उत्त्पति की। यह सब आधार हीन बाते है। हम आपको आज बताते है इनका जन्म कैसे हुआ, कौन है इनके माता पिता और क्या इनकी मृत्यु होती है वह भी प्रमाणों क साथ।
ब्रम्हा विष्णु शिव जी की माता कौन है?
ब्रम्हा विष्णु शिव जी की माता दुर्गा जी है जिनको प्रक्रति भी कहते है।
प्रमाण :- श्री देवी महापुराण (गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित) के तीसरे स्कंद
पृष्ठ 123 पर श्री विष्णु जी ने अपनी माता दुर्गा की स्तुति करते हुए कहा है किहे मात! आप शुद्ध स्वरूपा हो, सारा संसार आप से ही उद्भाषित हो रहा है, हम
आपकी कृपा से विद्यमान हंै, मैं, ब्रह्मा और शंकर तो जन्मते-मरते हैं, हमारा तो
अविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) हुआ करता है, हम अविनाशी नहीं हैं। तुम
ही जगत जननी और सनातनी देवी हो और प्रकृति देवी हो। शंकर भगवान बोले,
हे माता! विष्णु के बाद उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा जब आप का पुत्रा है तो क्या मैं
तमोगुणी लीला करने वाला शंकर तुम्हारी सन्तान नहीं हुआ अर्थात् मुझे भी
उत्पन्न करने वाली तुम ही हो।
इस देवी महापुराण के उल्लेख से सिद्ध हुआ कि
श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शंकर जी को जन्म देने वाली माता श्री दुर्गा
देवी (अष्टंगी देवी) है और तीनों देव नाशवान है।
इससे यह तो सिद्ध होता है की इन तीनो देव की माता दुर्गा जी है तो फिर पिता कौन हुआ ?
इन तीन देव के पिता का नाम है ज्योति निरंजन जिसे बह्र भी कहते है और उसका ॐ मन्त्र है.
प्रमाण :- श्री शिव महापुराण (गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित) में इनके
पिता का ज्ञान है, श्री शिव महापुराण के रूद्रसंहिता खण्ड में पृष्ठ 100 से 110तक निम्न प्रकरण है:-
अपने पुत्रा नारद जी के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री ब्रह्मा जी ने कहा कि
हे पुत्रा! आपने सृष्टि के उत्पत्तिकर्ता के विषय में जो प्रश्न किया है, उसका उत्तर सुन!
प्रारम्भ में केवल एक “सद्ब्रह्म” ही शेष था। सब स्थानों पर प्रलय था। उस
निराकार परमात्मा ने अपना स्वरूप शिव जैसा बनाया। उसको “सदाशिव” कहा
जाता है, उसने अपने शरीर से एक स्त्राी निकाली, वह स्त्राी दुर्गा, जगदम्बिका,
प्रकृति देवी तथा त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव) की जननी कहलाई जिसकआठ भुजाएं हैं, इसी को शिवा भी कहा है।
- श्री विष्णु जी की उत्पति :- सदा शिव और दुर्गा ने पति पत्नी कर्म किया जिसे एक पुत्र उत्पन हुआ जिसका नाम विष्णु रखा।
- श्री ब्रम्हा जी की उत्पति :- ब्रम्हा जी ने बताया जिस प्रकार विष्णु जी की उत्पति हुई, उसी प्रकार सदा शिव और दुर्गा जी से मेरी उत्पति हुई।
- शिव जी की उत्पति :-श्री शिव महापुराण के विध्वेश्वर संहिता खण्ड पृष्ठ 24 से 30 पर प्रमाण :-एक समय श्री ब्रह्मा जी तथा श्री विष्णु जी का इस बात पर युद्ध हो गया कि ब्रह्मा जी ने कहा मैं तेरा पिता हूँ क्योंकि यह संसार मेरे से उत्पन्न हुआ है, मैं प्रजापिता हूँ। विष्णु जी ने कहा कि मैं तेरा पिता हूँ, तू मेरे नाभि कमल से उत्पन्न हुआ है। दोनों एक-दूसरे को मारने के लिए तत्पर हो गए। उसी समय सदाशिव अर्थात् काल ब्रह्म ने उन दोनों के बीच में एक सफेद रंग का प्रकाशमय स्तंभ खड़ा कर दिया, फिर स्वयं शंकर के रूप में प्रकट होकर उनको बताया कि तुम कोई भी कर्ता नहीं हो।हे पुत्रो! मैंने तुमको जगत की उत्पत्ति और स्थिति रूपी दो कार्य दिए हैं,इसी प्रकार मैंने शंकर और रूद्र को दो कार्य संहार व तिरोगति दिए हैं, मुझे वेदों में ब्रह्म कहा है। मेरे पाँच मुख हैं, एक मुख से अकार (अ), दूसरे मुख से उकारउ) तथा तीसरे मुख से मुकार (म), चैथे मुख से बिन्दु (.) तथा पाँचवे मुखसे नाद (शब्द) प्रकट हुए हैं, उन्हीं पाँच अववयों से एकीभूत होकर एक अक्षर ओम् (ऊँ) बना है, यह मेरा मूल मन्त्रा है।उपरोक्त शिव महापुराण के प्रकरण से सिद्ध हुआ कि श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णुजी तथा श्री शकंर जी की माता श्री दुर्गा देवी (अष्टंगी देवी) है तथा पिता सदाशिव अर्थात् “काल ब्रह्म” है जिसने श्रीमद् भगवत गीता का ज्ञान श्री कृष्णजी में प्रवेश करके बोला था। इसी को क्षर पुरूष, क्षर ब्रह्म भी कहा गया है। यही प्रमाण श्री मद्भगवत गीता अध्याय 14 श्लोक 3 से 5 में भी है कि रज् (रजगुणब्रह्मा), सत् (सतगुण विष्णु), तम् (तमगुण शंकर) तीनों गुण प्रकृति अर्थात् दुर्गादेवी से उत्पन्न हुए हैं। प्रकृति तो सब जीवों को उत्पन्न करने वाली माता है।मैं (गीता ज्ञान दाता) सब जीवों का पिता हूँ। मैं दुर्गा (प्रकृति) के गर्भ में बीजस्थापित करता हूँ जिससे सबकी उत्पत्ति होती है। खुद अपनी आँखो से सचाई जाने क लिए यह वीडियो देखे
गीता जी में प्रमाण ब्रम्हा विष्णु शिव जी के माता पिता का
यही प्रमाण श्री मद्भगवत गीता अध्याय 14 श्लोक 3 से 5 में भी है कि रज् (रजगुणब्रह्मा), सत् (सतगुण विष्णु), तम् (तमगुण शंकर) तीनों गुण प्रकृति अर्थात् दुर्गादेवी से उत्पन्न हुए हैं। प्रकृति तो सब जीवों को उत्पन्न करने वाली माता है।मैं (गीता ज्ञान दाता) सब जीवों का पिता हूँ। मैं दुर्गा (प्रकृति) के गर्भ में बीजस्थापित करता हूँ जिससे सबकी उत्पत्ति होती है।
सदा शिव और शिव में अंतर है
सदा शिव तमगुढ़ शिव क पिता है और इन्ही सदा शिव से ही ब्रम्हा विष्णु जी की उत्पति हुई।
देखिये प्रमाण शिव पुराण से ही।
ऊपर की तस्वीर से सिद्ध होता है कि सदा शिव(काल) और शिव दो अलग -अलग है।
सदा शिव(काल) और दुर्गा जी के बीच सम्बन्ध
ऊपर के प्रमाणों से यह तो सिद्ध हो गया की ब्रम्हा विष्णु शिव जी की उत्पति सदा शिव और दुर्गा जी से हुई तो क्या वाकई में सदा शिव और दुर्गा जी पति पत्नी है?
आइए इसको भी प्रमाणों के साथ जानते है।
प्रमाण :- श्री देवी महापुराण (गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित) के तीसरे स्कंद
पृष्ठ 114 -115




Right
ReplyDeleteबहुत बढ़िया ज्ञान दिया है आप लोगों ने
ReplyDeleteBahut hi acchaa
ReplyDeleteVery nice.....
ReplyDeleteAchhi jankari
ReplyDeleteNYC👍👍
ReplyDeleteNyc...correct and prooved facts in our holy books
ReplyDelete